Pratham Singh प्रशिक्षु in जीव विज्ञान
यकृत के कार्य बताइये

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Deva yadav प्रशिक्षु
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यकृत के कार्य  

शरीर की सबसे बड़ी ग्रंथि यकृत है। इसे जिगर या कलेजा भी कहा जाता है। अंग्रेजी में इसे लीवर (liver) के नाम से जाना जाता है। यह शरीर में पित्त रस का निर्माण करती है। यकृत का वजन डेढ़ से 2 किलोग्राम के बीच होता है। इसके पीएच का मान 7.5 होता है। जिस व्यक्ति की मृत्यु विश द्वारा की गई हो उसकी पहचान यकृत के द्वारा ही की जा सकती है।

यकृत दो भाग या पालिया (lobes) दाइने और बाईने में में बटा हुआ है। यह शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है।

                   यकृत                                                                                      चित्र – यकृत

यकृत के कार्य निम्नलिखित हैं —

  • यकृत मुख्य ऊष्मा उत्पादन करने वाला अंग हैं।
  • लसीका के निर्माण का प्रमुख केंद यकृत हैं।
  • ग्लूकोज से बनने वाले ग्लाइकोजन को संग्रहित करना।
  • ग्लाइकोजन की आवश्यकता होने पर ग्लूकोस में परिवर्तित होकर रक्तधारा में प्रवाहित हो जाता है।
  • पचे हुए भोजन से वसाओं और प्रोटीनों को संसिधत करने में मदद करना।
  • रक्त का थक्का बनाने के लिये आवशक प्रोटीन को बनाना।
  • भ्रुणिय अवस्था में या गर्वावस्था में यह रक्त (Blood) बनाने का काम भी करता है।
  • पित्त लवण और पित्त वर्णक का स्रवण करता है।
  • रक्त से रक्तिम-पित्तवर्णकता को अलग करता है।
  • गैलेक्टोज को ग्लूकोज में परिवर्तित करता है।
  • कार्बोहाइड्रेट और प्रोटीन को वसा में परिवर्तित करता है।
  • एंटीबॉडी और प्रतिजन का निर्माण करता है।
  • विटामिन B12 के संचय के लिए यकृत अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
  • शरीर में विटामिन B12 लाल रक्ताणुओं के पर्याप्त निर्माण के लिए अति आवश्यक होता हैं।
  • यकृत में कैरोटिनॉइड पिंग्मेंट से विटामिन A का निर्माण होता हैं इसके अलावा वसा में घुलनशील विटामिन A, D, E, K होते हैं।
  • विटामिन k कुछ भोज्य पदार्थों में उपस्थित रहता है और बैक्टीरिया द्वारा आंतों में भी बनता है इसे प्रोथ्रोम्बिन बनाने के लिए यकृत में शोषित होना पड़ता है।
  • यकृत हमारे शरीर में ग्लाईकोजन, आयरन, वसा, विटामिन ए व डी का भण्डारण भी करता है।
  • शरीर से औषधियों, विषों, भारी धातुओं तथा टिन और पारद आदि को बाहर निकालने में सहायक है।
  • विषहरण (Detoxification) डीटॉक्सीफिकेशन इसका अर्थ हैं शरीर के आन्तरिक तंत्र को भोजन में मौजूद विषैले और हानिकारक रसायनों से मुक्त करना।
  • भ्रूण में यकृत RBC का निर्माण करता हैं वयस्क में यह आयरन, कॉपर और विटामिन B12 (एंटी एनिमिक फैक्टर) को संचित रखता हैं और RBC और हीमोग्लोबिन निर्माण में सहायक करता हैं।

 

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